स्टोर ले-आउट से जुड़े ट्रिक और मनोविज्ञान
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स्टोर की जगह का सही उपयोग करते हुए स्टोर के सामान को आकर्षक तरीके से रखना जिससे कस्टमर आकर्षित हों, को स्टोर ले आउट कहा जाता है।” 

क्या आप जानते हैं कि स्टोर ले-आउट कस्टमर की सोच पर काफी प्रभाव डालते हैं और इससे उनकी सोच प्रभावित होती है? 

स्टोर में जाकर ख़रीददारी करना अभी भी चलन में है और छोटे-बड़े सभी प्रकार के खुदरा विक्रेताओं को अपने स्टोर के ले आउट को बदल कर बिक्री बढ़ाने में मदद मिल रही है! आप दुकान के बाहरी हिस्से से केवल कस्टमर को आकर्षित नहीं करना चाहते, बल्कि उन्हें ख़रीददारी का एक ऐसा अनुभव देना चाहते हैं जो यादगार होने के साथ सुविधाजनक भी हो। 

इसके लिए, कस्टमर साइकोलॉजी समझने के साथ-साथ यह जानना भी जरूरी है कि आपके स्टोर का ले-आउट ग्राहक को किस तरह से सकारात्मक या नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।

स्टोर ले आउट का मतलब केवल यह नहीं है कि आपका स्टोर कैसा दिखता है, बल्कि यह भी है कि आपके ग्राहक आपके स्टोर खरीदारी करने के लिए प्रेरित हो रहे हैं, या नहीं। 

खुदरा व्यापारी, विशेष रूप से बड़े व्यवसाय अक्सर प्रोडक्ट प्लेसमेंट के पीछे बहुत रिसर्च और रिसोर्स लगाते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि उनके ग्राहकों पर ऐसे परिवर्तनों का क्या प्रभाव होगा। 

क्या आप भी ऐसे इन-स्टोर रिटेल रणनीतियों के महत्व को समझते हैं? 

यदि नहीं, तो आप अपने व्यवसाय को बढ़ाने के एक अच्छे अवसर को खो रहे हैं और ऐसी चीजों पर संसाधन बर्बाद कर रहे हैं जो बेहतर तरीके से काम नहीं करते हैं! 

बिज़नेस में कस्टमर राजा होता है और अपने संभावित ग्राहकों को वफादार कस्टमर में बदलने के लिए कस्टमर साइकोलॉजी के सिद्धांतों के अनुसार काम करना आवश्यक है।

वर्षों के अनुसंधान के बाद, हम यह कह सकते हैं कि आपकी बिक्री को तय करने में स्टोर का डिज़ाइन और ले आउट एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। व्यवसायी और विशेष रूप से छोटे व्यवसायी ग्राहकों को आकर्षित करने और उन्हें रिटेन करने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। हालाँकि, इन सब में एक सबसे जरूरी और मौलिक रणनीति जिसे अक्सर अनदेखा किया जाता है वह है, स्टोर ले-आउट रिडिज़ाइनिंग। यदि आपने अपने स्टोर ले-आउट की योजना बनाते समय कस्टमर साइकोलॉजी को ध्यान में नहीं रखा है, तो यह निश्चित है कि आपके सभी संभावित ग्राहक आपके उन प्रतिस्पर्धियों के पास जा रहे हैं जो कस्टमर की सोच अनुसार काम कर रहे हैं!

आगे हम विभिन्न ले आउट के टिप्स और ट्रिक्स को समझते हैं और जानते हैं कि कैसे स्टोर में साधारण सा परिवर्तन आपकी बिक्री को लगभग तुरंत बदल सकता है।

स्टोर ठीक से व्यवस्थित नहीं हैं, इसलिए आप नुकसान उठा रहे हैं

क्या आपके प्रतियोगी का स्टोर आपसे बेहतर बिज़नेस कर रहा है? 

क्या आपने बिक्री बढ़ाने के लिए कई रणनीतियों पर पैसे खर्च किए लेकिन कोई भी आपकी इच्छा अनुसार काम नहीं कर रहा है? 

यदि इनमें से किसी भी प्रश्न का उत्तर हाँ है, तो हमें लगता है कि हम इसके पीछे का कारण जानते हैं। बिजनेसमैन अक्सर यह भूल जाते हैं कि ग्राहक आपके स्टोर में आने के बाद सबसे पहले आपके स्टोर के ले-आउट को नोटिस करते हैं।

जैसे, ग्राहक जो खरीदना चाहता है, वो उसे आसानी से ढूंढ पा रहा है या नहीं। जब ग्राहक स्टोर में था, तब उसे आपके स्टोर में चल रहे सारे ऑफर पता चले या नहीं, या किसी एक केटेगरी के सामानों को ढूंढ़ने के लिए आपके स्टोर में अच्छी तरह से निर्देश दिए हुए थे या नहीं।

ले आउट को डिज़ाइन करने के लिए सिर्फ बेसिक साइकोलॉजी की आवश्यकता नहीं होती है, बल्कि इसमें क्रिएटिविटी और टेस्टिंग के कई चरण भी शामिल होते हैं ताकि यह पता चल सके कि आपके स्टोर के लिए क्या काम करता है और क्या नहीं।

यहाँ फ्लोर प्लान और लाइटिंग से लेकर कैश काउंटर्स के प्लेसमेंट तक, सब कुछ मायने रखता है। यदि आपके स्टोर ने ऐसी विशेषताओं को कोई महत्व नहीं दिया है, तो कोई आश्चर्य नहीं कि आपके ग्राहक दूसरे बड़े ब्रांडो की ओर आकर्षित हो रहे हैं! चाहे आपकी किराने की दुकान हो या एक छोटा बुटीक हो, स्टोर ले आउट रणनीतियां ग्राहकों को आपकी दुकान की ओर प्रभावित करने में सबसे प्रभावी उपकरण बन सकते हैं।

ले आउट को रीस्ट्रक्चर करना आसान है, इसलिए इस बारे में चिंता न करें! थोड़े से बदलावों के साथ, आप अपनी कमाई को उम्मीद से अधिक तेज़ी से बढ़ते हुए देख सकते हैं । इसमें केवल आपके प्रोडक्ट या सर्विस को बेहतर होने की जरूरत नहीं है बल्कि ग्राहक की ख़रीददारी अनुभव को भी बेहतर होना जरूरी है। जब अधिक ख़रीदार आपकी व्यापारिक रणनीतियों से आकर्षित होते हैं तो वे आपके स्टोर में उतना ही खर्च भी करते हैं।

आइए हम एक उदाहरण से समझते हैं कि रीस्ट्रक्चर करना कितना आसान है!

ये तो हम सब जानते हैं कि बच्चे अक्सर अपने माता-पिता को सामान खरीदने के लिए प्रभावित करते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए यदि आपकी किराने की दुकान है तो आप हाई प्रोफिट वाले सामानों को ऐसी जगह पर रखें जहाँ से बच्चों की नजर उनपर आसानी से पहुँचती हो, न कि माता-पिता की नज़रों में आने वाले जगह पर सामान रखें। अगर आपके पास जगह कम है तो आप ऐसे आकर्षक चीजें डिस्प्ले कर सकते हैं जिससे बच्चों की नज़र ऊपर के शेल्फ तक पहुंचे। क्यों है न आसान!

स्टोर के आकार और साइज के अनुसार, ग्रिड, लूप या फ्री-ले आउट जैसे कई ले आउट चुने जाते हैं। सभी ले आउट के अपने विशिष्ट फायदे हैं जिस पर हम बाद में चर्चा करेंगे।

पहले यह जरूरी है कि आप अपने स्टोर की डिज़ाइन और वहाँ आने वाले ग्राहकों की संख्या को जानने की ओर ध्यान दें! एक छोटे बिज़नेस के तरीके से, आपके स्टोर में आने वाले ग्राहकों की संख्या और उनके किस्म को समझना आपके लिए महत्वपूर्ण है। उनके ब्राउज़िंग पैटर्न और रूझानों को समझने और स्टडी करने के बाद, आप यह समझ सकते हैं कि बिक्री बढ़ाने के लिए प्रोडक्ट्स को किस जगह पर रखा जाए।

अब, हम यह जानते हैं कि बाज़ार के कुछ सबसे बड़े खिलाड़ी स्टोर ले-आउट रणनीतियों को बिक्री बढ़ाने के लिए कैसे उपयोग करते हैं।

कैसे बड़े ब्रांड कुछ तकनीकों का इस्तेमाल ग्राहकों को अधिक खरीदने को प्रेरित करने के लिए कर रहे हैं

ध्यान देने की महत्वपूर्ण बात यह है कि स्टोर केवल अच्छा नहीं दिखे बल्कि वहाँ आपके कस्टमर को खरीदारी आसान और अच्छा लगे। स्टोर का डिज़ाइन इस तरह का होना चाहिए कि वह कस्टमर की इस साइकोलॉजी को ट्रीगर करें जो उन्हें आपके स्टोर से ख़रीददारी करने और वहां अधिक समय बिताने के लिए प्रेरित करे।

आइए एक उदाहरण से स्टोर ले आउट ट्रिक्स को बेहतर तरीके से समझते हैं।

टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के एक अग्रणी नाम एप्पल (Apple Inc.) ने अपने स्टोर की प्लानिंग और डिज़ाइन करते समय स्थिरता पर ध्यान केंद्रित किया है। उनके दृष्टिकोण में स्पॉटलाइट में उनके सभी उत्पादों के साथ उनके ग्राहकों के लिए एक न्यूनतम अनुभव शामिल है।

प्रत्येक एप्पल स्टोर में, चाहे वह भारत में हो या जर्मनी एयरपोर्ट पर, कस्टमर को एक ही प्रकार का इन-स्टोर अनुभव मिलता है, क्योंकि उन्होंने सीखा है कि यह तकनीक सबसे बेहतर तरीके से काम करता है और ग्राहकों की अपेक्षाओं को पूरा करता है। आपने यह भी ध्यान दिया होगा कि उनके सभी उत्पाद एक जैसे कोण में रखे जाते हैं, ताकि वे अधिक ध्यान आकर्षित कर सकें।

कई स्टोर वाले व्यवसाय के लिए एक ट्रिक यह है कि वे अपने सभी स्टोर में एक समान ले आउट रखें। इसमें उनका फ्लोर प्लान, प्रोडक्ट्स को रखने की स्थिति, प्रकाश व्यवस्था, डिज़ाइन, रंग आदि शामिल हैं। इससे आपके ग्राहकों का आपके ब्रांड को देखने का नज़रिया बदलेगा और यह खुदरा ब्रांडो के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।

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तो एप्पल ने अपने ग्राहकों में समान स्टोर ले आउट के साथ किन मूल्यों को स्थापित किया है?

  • ट्रस्ट बिल्डिंग – आपका स्टोर कहीं भी हो, एक अनुकूल स्टोर डिज़ाइन ने एप्पल को उनके संभावित कस्टमर की नज़र में ब्रांड विशिष्टता बनाने में मदद की है। यह कस्टमर को ब्रांड पर विश्वास के निर्माण करने और ब्रांड पर निर्भर होने की अनुमति देता है।

  • बेहतर पहचान – सभी दुकानों में समानता के साथ, एप्पल एक स्पष्ट उद्देश्य और डिज़ाइन दिखाता है, जिससे लोगों के मन में कोई भ्रम नहीं रहता है। उदाहरण के लिए, यदि आप बाहर से एक एप्पल स्टोर को देखते हैं तो दुकान का नाम देखे बिना भी आपको पता चल जाएगा कि यह किस ब्रांड का स्टोर है।

  • गुणवत्ता में वृद्धि – एक समान ले आउट ब्रांड के विचार को विस्तार से प्रतिबिंबित करता है और बदले में यह एप्पल की गुणवत्ता और सेवा पर भरोसा करने में ग्राहक की मदद करता है। उन्होंने केवल अपने उत्पादों पर ही ध्यान नहीं केंद्रित किया है, बल्कि एक ग्राहक की ख़रीददारी के अनुभव और स्टोर में सही माहौल बनाने पर भी ध्यान दिया है।

यह ग्राहकों को ऐसे निर्णय लेने की ओर ले जाता है जिससे ब्रांड को भी लाभ पहुँचता है।

बिग बाजार और उसके जैसे अधिक बड़े डिपार्टमेंट स्टोर का उदाहरण लेते हुए, हम देख सकते हैं कि कैसे उनके ले आउट ग्राहक के चलने के लिए व्यापक गलियारे जैसे हैं।

ऐसा इसलिए है क्योंकि बिक्री एरिया में अतिरिक्त सामान उस एरिया में भीड़ बढ़ा सकती है, जो कई ग्राहकों को कम आकर्षक लगता है। एक ख़रीदार अक्सर एक आरामदायक ख़रीददारी अनुभव के लिए अधिक स्वच्छ और विस्तृत गलियारे को प्राथमिकता देता है।

आपने देखा होगा कि किराने की कई दुकानों में दूध और अंडे जैसी बुनियादी वस्तुओं को स्टोर के बहुत अंत में रखा जाता है ताकि खरीदारों को वहाँ तक पहुंचने के लिए कई अन्य शेल्फ और प्रोडक्ट्स से होकर गुजरना पड़े और यह तकनीक उन्हें कुछ अतिरिक्त वस्तु खरीदने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है।

ऊपर बताए गए स्टोर ले आउट रणनीतियों को अत्यंत उपयोगी और लाभदायक माना गया है।

आइकिया स्टोर्स का उदाहरण (सामान्य और प्रभावी खरीदी बढ़ाने की टॉप-टीयर तकनीक)

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के एलन पेन का कहना है कि “IKEA स्टोर का ले आउट एक मनोवैज्ञानिक यंत्र है जिसका इस्तेमाल खरीददारों को अधिक खर्च करने और भ्रमित करने के लिए किया जाता है।

IKEA दुनिया के सबसे बड़े खुदरा फर्नीचर विक्रेताओं और फर्नीचर ब्रांडों में से एक है। कई लोग मानते हैं कि इनका स्टोर ले आउट बेहतरीन निपुणता वाला है, जिससे आवेगी ग्राहकों की संख्या को बढ़ाने में मदद मिलती है !

IKEA के साथ, हम देख सकते हैं कि यह केवल अच्छी तरह से डिज़ाइन किए गए प्रोडक्ट की पेशकश के बारे में नहीं है, बल्कि एक ग्राहक के ख़रीददारी अनुभव के बारे में भी है।

यदि इसके स्टोर डिज़ाइन की बात करें तो यह वन वे गोलाकार डिज़ाइन है। भूलभुलैया वाली डिज़ाइन में ख़रीदार कुछ चुनिंदा सामान खरीदने जाते हैं और अंत में उनके पास उत्पादों से भरे बैग होते हैं। प्रोडक्ट्स को इस तरह से रखा जाता है कि कस्टमरप स्टोर के चारों ओर घूमते हैं क्योंकि वे आगे के प्रोडक्ट को नहीं देख सकते।

कुछ अनदेखे और अनोखे प्रोडक्ट को न देख पाने के डर से अक्सर कस्टमर दुकान के सभी कोनों में घूमते हैं। भूलभुलैया जैसी रचना कस्टमर को एक ऐसी बेहतरीन दुनिया में लेकर जाते हैं और साथ ही यह भी दिखाते हैं कि कितने विभिन्न प्रकार के IKEA प्रोडक्ट्स हैं।

स्टोर “बुल्ला-बुल्ला” तकनीक का उपयोग करने के लिए जाने जाते हैं, जिसमें उत्पादों को डिब्बे में रख दिया जाता है जो यह दिखाता है कि उनके पास बड़ी मात्रा में कम कीमत के प्रोडक्ट्स हैं। जिस तरह से इनके प्रोडक्ट्स जैसे फर्नीचर, तकिए, और अन्य घरेलू सामान को जिस तरह से नकली कमरों में सज़ाएँ जाते हैं, वह एक और आकर्षक स्टोर ले आउट रणनीति का हिस्सा है।

यह सेटिंग केवल ग्राहकों को IKEA प्रोडक्ट्स के विषय में नहीं बताता बल्कि एक परिचित और  स्वाभाविक सेटिंग्स के कारण कस्टमर को उनकी सराहना करने के लिए प्रोत्साहित भी करता है। उनकी ले आउट रणनीति ग्राहकों को एक-दिशात्मक रास्ते की ओर ले जाती है जो उन्हें अपने पूरे स्टोर में घूमने और उनके सभी इन्वेंट्री को देखने के लिए प्रेरित करती है।

हालांकि बीच में निकलने का छोटा सा रास्ता होता है लेकिन आप बहुत कम ग्राहकों को इस शॉर्ट-कट्स को लेते देखेंगे। इस रास्ते पर फर्श पर बने बड़े से दिशा बताने वाले निशान स्टोर मैप्स के साथ इधर-उधर गाइड करते हैं।

IKEA का स्टोर ले आउट खरीदारों को उन वस्तुओं को खरीदने के लिए भ्रमित करता है जिनकी उन्हें ज़रूरत नहीं है और जो उनकी ख़रीददारी सूची में नहीं थे। जैसे ही ग्राहक को कुछ आकर्षक दिखाई देता है, वे इसे तुरंत इस डर से अपनी ट्रॉली में डाल लेते हैं कि वे बाद में इसे खोजने में सक्षम नहीं होंगे।

यह ग्राहकों को बगैर प्लानिंग के खरीदी  को ट्रिगर करता है। IKEA का लक्ष्य दुनिया भर में उसके स्टोर डिज़ाइन के समानता का होता है, लेकिन कभी-कभी, संबंधित देश की स्थानीय संस्कृतियों और रूची के अनुसार वह इसमें बदलाव करता है। उदाहरण के लिए, चीन में IKEA स्टोर में चीनी आबादी के अनुसार बालकनियों के साथ छोटे कमरे हैं।

इन सभी ले आउट रणनीतियों के साथ, हम देख सकते हैं कि कैसे IKEA ने कस्टमर साइकोलॉजी के सिद्धांतों को क्रैक किया है और इसका उपयोग अपने लाभ के लिए किया है। स्टोर एंबियंस, बड़े वोल्यूम और कम कीमत, भूलभुलैया जैसी संरचना और एक-दिशा में जाने वाले रास्ते खुदरा ब्रांड की बिक्री को बढ़ावा दे रहे हैं।

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छोटे भारतीय खुदरा विक्रेता अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए इन तरकीब का उपयोग कैसे कर सकते हैं

ऐसा लगता है कि ये सभी टिप्स और ट्रिक्स को लागू करना बड़े ब्रांड के लिए ही आसान है। लेकिन ये छोटे स्तर के रिटेलर के लिए भी आसान है। अपने स्टोर ले आउट को डिज़ाइन करने से पहले, ग्राहकों की नीचे बताई आदतों पर ध्यान दें:

  • ख़रीदार वामावर्त चलते हैं, इसलिए जब आप उन्हें एक दुकान में प्रवेश करते हुए देखते हैं, तो आप लगभग सभी को उनके दाहिनी ओर मुड़ते हुए देखेंगे।

  • जब दुकान में कई मंज़िलें होती हैं, तो खरीददारों को अक्सर असुविधा होती है। वे अपने सभी सामान को उसी मंज़िल पर पाना चाहते है जहाँ उन्होंने प्रवेश किया है।

  • खरीदारों को तंग गलियारे भी असहज लगते हैं, इसलिए सुनिश्चित करें कि आपकी दुकान के गलियारे काफी चौड़े हैं।

आइए देखें कि आप इंडस्ट्री लीडर से कैसे सीख सकते हैं और अपने व्यवसाय के लिए एकदम सही ले आउट रणनीतियों को डिज़ाइन कर सकते हैं।

सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपके स्टोर की मंज़िल योजना को और ग्राहक द्वारा प्रोडक्टस को खोजने के लिए स्टोर के भीतर आने वाले रास्ते की प्लानिंग उचित तरीके से करनी होगी। आप या तो पूर्व-निर्धारित ले आउट का उपयोग कर सकते हैं जो आमतौर पर उपयोग किए जाते हैं या आप अपने ग्राहकों को जिस तरह की सुविधा देना चाहते हैं या ख़रीददारी कराना चाहते हैं उसके आधार पर खुद डिज़ाइन कर सकते।

आइए खुदरा विक्रेताओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले 3 सबसे सामान्य ले आउट को समझते हैं:

ग्रिड ले-आउट

यह ले आउट सबसे अधिक लागत और स्थान प्रभावी डिज़ाइनों में से एक है जो ग्राहकों को आपके पूरे स्टोर में घूमने और उन प्रोडक्टस को खोजने में सक्षम बनाता है जिनकी उन्हें ज़रूरत है। गलियारे लगभग एक ही चौड़ाई के होते हैं जिसमें दोनों तरफ शेल्फ समान रूप से व्यवस्थित होते हैं और स्टोर के प्रवेश / निकास द्वार पर कैश काउंटर होते हैं। इस तरह के ले आउट के उपयोग का एक अच्छा उदाहरण सुपरमार्केट है।

रेसट्रैक ले-आउट

यदि आपका उद्देश्य आपके ग्राहक को एक काव्यात्मक कहानी बताना है, तो यह आपके लिए सबसे अच्छा ले आउट है। यहां, सभी गलियारों को अलग-अलग रंगों, सतहों का उपयोग करके एक दूसरे से अलग किया जाता है, और प्रत्येक विभाग में अलग-अलग कैश काउंटर होते हैं।

इस प्रकार के स्टोर ले आउट हर विभाग के प्रोडक्टस को लोगों की नज़र में रखता है, बगैर प्लानिंग ख़रीददारी को बढ़ावा देता है और आपके ग्राहकों के लिए बिलिंग समय को कम करता है। रेसट्रैक ले आउट विभिन्न फैशन स्टोर में पाए जा सकते हैं।

फ्री फॉर्म ले-आउट

इस तरह के ले आउट का उपयोग ज्यादातर छोटे बुटीक में किया जाता है। इस प्रकार के ले आउट ग्राहकों को एक आरामदायक और घर जैसा महसूस कराता है। इस योजना में संगठित गलियारों के साथ विषम डिज़ाइन शामिल हैं। हालांकि, आपको यह ध्यान रखना होगा कि इस तरह के ले आउट को लचीले ढंग से डिज़ाइन किया जाना चाहिए, ग्राहक की वरीयताओं और ट्रेंड के अनुसार बदलाव के लिए खुला होना चाहिए।

इसका कारण यह है कि ग्राहक को जो चीज आज सकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है वह कल नहीं भी कर सकता है। इस तकनीक का उपयोग करने वाले रिटेलर्स अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन कर सकते हैं, लेकिन बदलाव को स्वीकार करने के लिए उन्हें तैयार रहना होगा।

भारतीय खुदरा विक्रेताओं के उपयोग में आने वाले कुछ सुझाव

  • आकर्षक विंडो डिस्प्ले – अधिक ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए, अलग और आकर्षक विंडो डिस्प्ले होना महत्वपूर्ण है।

  • अव्यवस्था को ‘नहीं’ – प्रवेश द्वार पर बहुत सारे प्रोडक्ट रखने या सजावट करने का प्रयास न करें। प्रवेश द्वार से कुछ फीट की दूरी पर स्थित क्षेत्र को ‘डिकंप्रेसन ज़ोन’ के रूप में जाना जाता है और यहाँ ग्राहक अधिक ध्यान नहीं देते हैं।

  • प्रोडक्ट खोजने में मदद – अपने स्टोर के प्रोडक्टस को खोजने में मदद करके अपने ग्राहक की ख़रीददारी के अनुभव को आसान बनाएँ। आप संकेत, ग्राफिक, विशिष्ट क्षेत्रों को चिह्नित कर सकते हैं, विशेष प्रोडक्ट रैक रख सकते हैं और विनाइल पोस्टर की मदद से ऑफर भी दिखा सकते हैं।

  • अपने प्रोडक्ट को आँख के स्तर पर रखें – अपनी बिक्री को और अधिक बढ़ावा देने के लिए यह सुनिश्चित करें कि ग्राहक आपके प्रोडक्ट्स को देख रहे हैं यानी आपके प्रोडक्ट्स ऐसी जगह पर हो जहाँ से कस्टमर उन्हें आसानी से देख सकें।

  • सही रोशनी – सुनिश्चित करें कि प्रोडक्टस को स्पॉटलाइट में रखे ताकि वे बेहतर दिखें और बिके।

  • चेक आउट क्षेत्रों में प्रोडक्ट्स – बगैर प्लानिंग किए ख़रीददारी को बढ़ाने के लिए अपनी कम लागत वाले प्रोडक्ट्स को चेक आउट और अधिक आवाजाही वाले क्षेत्र में रखें। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि चेक आउट लाइन बहुत लंबी नहीं है और ग्राहकों के बाहर निकलने के लिए पर्याप्त जगह है, खरीदारों के आराम स्तर को बढ़ाएगा।

  • क्रॉस मर्चेंडाइजिंग – श्रेणियों और विभागों में समान और पूरक उत्पादों को अलग करके रखने से, ग्राहक आपके स्टोर पर ख़रीददारी की सुविधा की सराहना कर सकते हैं।

रिटेलर्स एक विजुअल मर्चेंडाइजिंग टूल प्लानोग्राम का उपयोग कर सकते हैं, जो प्रोडक्ट के प्लेसमेंट को विस्तार से बता कर आपकी सहायता करता है।

यह कंफ्यूजन कम करता है और यह सुनिश्चित होता है कि बिक्री को अधिकतम करने के लिए शेल्फ पर प्रोडक्ट प्लेसमेंट के तकनीक का पालन हो रहा है। आप या तो अपने ले आउट की प्रक्रिया में सहायता के लिए एक प्लेनेग्रामर को रख सकते हैं या आपके उद्योग के अनुसार पहले से ही तैयार कई टेम्प्लेट का उपयोग कर सकते हैं!

बिक्री बढ़ाने के लिए ब्रांड कैसे अपने खुदरा विक्रेताओं की मदद कर रहे हैं

क्या आपने कभी छोटे स्टोर और यहां तक ​​कि अपने शहर के बड़े डिपार्टमेंटल स्टोर में कैडबरी स्क्वायर चॉकलेट बॉक्स देखा है?

रेस्तरां और सड़क किनारे वाले ढाबों पर लगे पेप्सीको पेय के फ्रीज के बारे में आपका क्या ख्याल है?

कैडबरी और पेप्सिको उन कंपनियों के उदाहरण हैं, जिन्होंने अपने उत्पादों को बेचने के लिए देश भर के खुदरा विक्रेताओं के साथ जोड़ी बनाने के लिए अपनी ब्रांड पहचान का उपयोग किया है। ब्रांड की ओर से इन ब्रांडिंग तकनीकों को न केवल खुद के लाभ के लिए लाया गया है, बल्कि उन्हें बेचने वाले खुदरा विक्रेताओं को लाभ होता है।

हम कह सकते हैं कि यह ‘स्टोर-के अंदर-स्टोर’ रणनीति खुदरा विक्रेताओं को अधिक ग्राहकों को आकर्षित करने, अधिक इन्वेंट्री देने और अधिक बिक्री करने में सक्षम बनाती है। जबकि, कैडबरी जैसे ब्रांड ऐसे अवसरों का उपयोग न केवल अपनी बिक्री को बढ़ाने के लिए कर रहे हैं, बल्कि इससे अपनी ब्रांड की पहचान भी बना रहे हैं।

रिटेलर को इसका एहसास नहीं होता है, लेकिन ब्रांड द्वारा अपने उत्पादों के लिए विशेष शेल्फ या अलग पैकेजिंग प्रदान करके वे ऑटोमेटिक तरीके से खुदरा विक्रेताओं के स्टोर का ले आउट बदल रहे हैं। यदि आपके पास एक छोटा सा डिपार्टमेंटल स्टोर या फ़ार्मास्युटिकल स्टोर है, तो ऐसी संभावना है कि कैडबरी जैसी कंपनियों ने अपने उत्पादों और विशिष्ट पैकेजिंग बॉक्स के साथ आपसे संपर्क किया हो।

वे इन्हें कैश काउंटर या चेक आउट एरिया के पास रखने का आग्रह करते हैं। क्या आपने सोचा है कि ये रिटेलर्स को कैसे फायदा या नुकसान पहुंचा सकते हैं? ब्रांड की पहचान बनाने की इन रणनीतियों के परिणामों को जानने के लिए आगे पढ़ें;

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इन तकनीकों को लागू करने के लाभ और नुकसान

जब मेजबान खुदरा विक्रेताओं के लिए इस तरह के ‘स्टोर-विदइन-ए-स्टोर’ (दुकान-में-दुकान) रणनीतियों के फायदे के बारे में बात करते हैं, तो उन्हें बिना किसी अतिरिक्त लागत के अपने स्टोर में इन्वेंट्री जोड़ने का मौका मिलता है। स्टोर में ऐसे विशिष्ट ब्रांडो को देखकर रिटेलर की बिक्री भी बढ़ सकती है।

यह विधि मेजबान खुदरा विक्रेताओं के लिए अपने स्टोर ले आउट और ब्रांड को फिर से नया करने के लिए एक सरल तरीका है। एक दूसरा लाभ यह है कि ग्राहकों के लिए अतिरिक्त सुविधा और प्रोडक्ट विविधता शामिल है, जो उन्हें एक अलग ख़रीददारी अनुभव प्रदान करता है।

प्रसिद्ध रिटेल स्टोर लाइफस्टाइल के उदाहरण में हम यह समझ सकते हैं कि ग्राहक कैसे एक ही जगह से अनगिनत ब्रांड के कपड़े, धूप के चश्मे, जूते, हैंडबैग और दूसरे कई तरह के सामान खरीद सकते हैं। यह सुविधा और स्टोर-विदइन-स्टोर दृष्टिकोण उन ग्राहकों के लिए आकर्षक है जो ख़रीददारी प्रक्रिया में लगाए गए अपने समय और प्रयास को महत्व देते हैं।

इन होस्ट विक्रेताओं के द्वारा अपने ग्राहक का विस्तार करने वाले ब्रांड के दृष्टिकोण से सोचकर हम देख सकते हैं कि कैसे ये ब्रांड बड़ी मार्केटिंग लागतों में कटौती करते हैं, अपनी इन्वेंट्री को स्वयं प्रबंधित करते हैं और बहुत अधिक प्रयास किए बिना अपने प्रोडक्ट की बिक्री भी बढ़ाते हैं।

बेशक, इस तरह की रणनीतियां मेजबान खुदरा विक्रेताओं और ब्रांड के लिए नुकसान भी लेकर आती है। होस्ट रिटेलर के सामने आने वाली कठिनाइयों की बात करें तो यह संभव है कि ब्रांड के प्रोडक्ट अतिरिक्त स्थान ले लें और स्टोर के ले आउट में अच्छी तरह से फिट न हों।

ब्रांड्स के प्रोडक्ट होस्ट-खुदरा प्रोडक्ट के साथ अनावश्यक प्रतिस्पर्धा का कारण बन सकते हैं और होस्ट की बिक्री को नुकसान पहुंचा सकते हैं। अतिरिक्त इन्वेंट्री रखने और अतिरिक्त प्रोडक्ट का ट्रैक रखने का मतलब होस्ट रिटेलर के लिए अतिरिक्त काम भी हो सकता है। होस्ट खुदरा विक्रेताओं को अक्सर इस ब्रांड रणनीति के परिणामों का एहसास नहीं होता है क्योंकि उनका मानना ​​है कि उन्हें एक अच्छी डील दी जा रही है। लेकिन ऐसा हो सकता है कि उनके ग्राहक शायद केवल इन उत्पादों पर अपना ध्यान केंद्रित करना शुरू कर सकते हैं, बाकी पर नहीं।

क्या विभिन्न उद्योग के स्टोर के लिए अलग-अलग ले आउट और सजावट की आवश्यकता है?

बेशक, प्रत्येक उद्योग को अपने ग्राहक के व्यवहार और प्राथमिकताओं के आधार पर विभिन्न ले आउट डिजाइनों की आवश्यकता होगी।लेकिन मुख्य बात यह है कि आपने अपना होम वर्क सही तरीके से किया है या नहीं।

प्रत्येक उद्योग सही ले आउट के साथ सफलता पा सकता है। स्टोर डिज़ाइन की योजना बनाने में समय और प्रयास लगता है, इसलिए इसमें जल्दबाजी न करें। आइए अलग-अलग योजनाओं को देखते हैं और जानते हैं कि वे किस प्रकार के उद्योग के लिए उपयुक्त हैं।

जैसा कि हमने पहले पढ़ा, स्टोर ले आउट के ढेर सारे विकल्प हैं जिन्हें खुदरा विक्रेताओं द्वारा चुना जा सकता है। अपने उत्पादों के आधार पर, आप एक सीधा, तिरछा, कोनेदार, रेस ट्रैक, ग्रिड, लूप, आदि ले आउट का चयन कर सकते हैं।

विभिन्न उद्योगों के अलग-अलग स्टोर डिज़ाइन के उपयोग के कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं;

  • स्ट्रेट फ्लोर प्लान सबसे अधिक लागत-कुशल और सीधा-स्पष्ट ले आउट में से एक है जिसमें दीवारों और फिक्स्चर का उपयोग कर छोटे स्थान को बिक्री क्षेत्र को अधिकतम उपयोग करने के लिए किया जाता है। इस तरह के ले आउट शराब की दुकान, सुविधा स्टोर या एक छोटे बाजार के लिए एक बेहतरीन विकल्प है!

  • एंगुलर (कोणीय) फ्लोर प्लान उन दुकानों के लिए आदर्श हैं जो ग्राहकों को हाई एंड और महंगे वातावरण का प्रतिबिंब  बनाना चाहती हैं। यहाँ, फर्श और शेल्फ की जगह का लिमिटेशन के कारण केवल चुनिंदा संख्या में प्रोडक्ट्स प्रदर्शित किया जाता है।

फिक्सचर के एंगल और कर्व्स का बेहतरीन ऐम्बीअन्स ग्राहकों को आकर्षित करते हैं। यदि आपका स्टोर लक्ज़री सेगमेंट का है, तो इस प्रकार का ले आउट आपके लिए एकदम सही है।

  • जियोमेट्रिक फ्लोर प्लान कपड़ों और परिधानों के लिए एकदम सही है, जो बड़ी रकम का निवेश किए बिना रचनात्मकता को दिखाते हैं। यहां, सभी अलमारियों और जोड़ एक असाधारण आकार या पैटर्न बनाते हैं जो उपभोक्ता से अपील करता है और उन्हें उन क्षेत्रों को आसानी से जाने और देखने की अनुमति देता है।

  • मिक्सड स्टोर ले आउट में कई ले आउट का मिश्रण होता है। उदाहरण के लिए, डिपार्टमेंटल स्टोर और किराना स्टोर अक्सर अपने उत्पादों को दिखाने के लिए सीधे, तिरछे और कोणीय डिज़ाइन के संयोजन का उपयोग करते हैं। इसके माध्यम से, ग्राहकों को बुनियादी किराने क्षेत्र में जाने की आज़ादी देते हैं लेकिन वाइन जैसी उच्च कीमत वाली वस्तुओं को कोणीय ले आउट के साथ प्रस्तुत किया जाता है।

निष्कर्ष

कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपका व्यवसाय किस आकार का है, स्टोर ले आउट की कुछ रणनीतियाँ वास्तव में आपके लिए खेल को बदल सकती हैं। यदि आपको ऐसा लगता है कि आपने अपने प्रोडक्ट प्लेसमेंट प्लानिंग करते समय किसी भी आवश्यक कस्टमर साइकोलॉजी सिद्धांतों को शामिल नहीं किया है, तो अभी करें क्योंकि शुरूआत करने के लिए कभी भी देर नहीं होती है।

यदि आप एक छोटे भारतीय रिटेलर हैं जो अपने ब्रांड और स्टोर को नई पहचान देना चाहते हैं, तो अपने स्टोर में आने वालों को खरीदारों में बदलने के लिए ऊपर की रणनीतियों से प्रेरणा लें!

जब यह तय करना कि कौन सा ले आउट आपके लिए बेहतर काम करता है तो रिसर्च और टेस्टिंग जरूरी है। प्रेरणा हासिल करने के लिए आप यह भी देख सकते हैं कि आपके प्रतियोगी और इंडस्ट्री लीडर के लिए किस तरह का ले आउट सबसे अच्छा काम कर रहा है।

याद रखें, यह केवल इस बारे में नहीं है कि आपका स्टोर कैसा दिखता है, बल्कि इस बारे में भी है कि आपके ग्राहक वहाँ कैसा महसूस करते हैं। ये छोटे छोटे बदलाव को आप एक बार किए गए निवेश के तरीके से देख सकते हैं लेकिन इन बदलावों से बिक्री में तेजी आपकी कल्पना से पहले आ सकती है। तो लेख में बताई गई रणनीतियों के साथ, हमने आपका आधा काम पहले ही कर दिया है, बस अब आपको आगे बढ़ना है!

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Prashant Kumar

Prashant Kumar

Associate Growth Manager

Prashant is Associate Growth Manager in PagarBook and manages all the organic web presence for brand. 

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